आखिरकार बंगाल की जनता ने फिर एक बार अपनी 'दीदी' ममता बनर्जी पर विश्वास कर बंगाल की कमान उनके हाथों में सौंप दी। ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। बंगाल की जनता ने बता दिया कि अभी भी दीदी का वर्चस्व कायम है। दूसरी तरफ अबकी बार दो सौ पार का नारा देकर बंगाल के चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं को झोंक देने वाली भारतीय जनता पार्टी का पासा उल्टा पड़ गया।बीजेपी के उलट टीएमसी को जनता ने दो सौ से ज्यादा सीटों पे जिता दिया। अस्सी से भी कम सीटों पर सिमटी अतिआत्मविश्वासी भारतीय जनता पार्टी के लिए आत्मचिंतन का समय है। बीजेपी कोरोना काल में भी दर्जनों रैलियां करने के बाद भी टीएमसी की जड़ें तक नहीं हिला सकी। निश्चय ही बीजेपी की ममता दीदी के ऊपर की गई अमर्यादित टिप्पणी हार की एक वजह हो सकती है लेकिन देश मे बढ़ रहे कोरोना से निपटने की विफल नीति,हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की समय पर आपूर्ति न कर पाना व बेड न मिल पाना बीजेपी सरकार की हार की मुख्य वजहें हैं। अब बीजेपी सरकार से उम्मीद है कि चुनाव के बाद कोरोना को काबू में करने के लिए कारगर नीति अपनाएगी।
रविवार, 2 मई 2021
शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021
कोरोना वायरस
किस मोड़ पे आ खड़े हम
ये कैसा मौसम है
हर दिल ग़मज़दा हर आंख नम है
क्या घुल गया इस शहर की बहती हवा में
जो भी निकला घर से बाहर समझो वो
खतम है..!!
शनिवार, 24 अप्रैल 2021
अक्स दिखा उनका
उजाले में चेहरा चमकता रहा उनका
असल चेहरा तो अंधेरे में दिखा उनका
बात इतनी है कि अब बात नही होती
यादों में भी सिर्फ अक्स दिखा उनका..!!
शुक्रवार, 12 मार्च 2021
शनिवार, 27 फ़रवरी 2021
निजीकरण इतना क्यों जरूरी?
सार्वजनिक उपक्रमों एवं पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण का कदम सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही से बचने जैसा है।संसद में प्रधानमंत्री जी द्वारा निजीकरण के ऊपर दिया गया भाषण भ्रमित करने वाला है।एक तरफ पीएम बोलते है कि नौकरशाहों के हाथ मे देश देकर हम क्या करने वाले हैं?और दूसरी तरफ कहते हैं कि देश के नौजवानों को भी मौका मिलना चाहिए।क्या पीएम देश के नौकरशाहों और युवाओं को अलग-2 मानते हैं?क्या देश के नौकरशाह कहीं और से आते हैं?क्या सरकारी बैंकों या पीएसयू में नौजवान काम नही करते?क्या सिर्फ प्राइवेट सेक्टर में ही हुनरमंद युवा पाए जाते हैं,पब्लिक सेक्टर में नहीं?क्या सरकारी बैंकों को प्राइवेट कर देने से वे जनता के हित मे काम करने लगेंगे? वास्तव में सरकार की सभी योजनाएं जो गांवों और गरीबों के फायदे पर केंद्रित होती हैं उनमे सरकारी बैंकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक 26 जून 2019 तक देश मे 35.99 करोड़ जनधन खाते थे जिनमे 34.73 करोड़ पीएसबी ने खोले थे जबकि सिर्फ़ 1.26 करोड़ खाते निजी बैंकों ने खोले।देश की सर्वाधिक लोकप्रिय अटल पेंशन योजना एवं सुरक्षा बीमा योजना के सफल क्रियान्वयन में भी सरकारी बैंक प्राइवेट बैंकों से कहीं आगे है।निजी क्षेत्र हर प्रोजेक्ट को नफा-नुकसान के तराजू पर तौलता है जबकि पीएसबी सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार कार्य करता है।कोरोना काल में जहाँ प्राइवेट अस्पतालों ने कोविड के मरीजों को लेने से मना कर दिया था तब उन्ही नौकरशाहों के नीतियों के चलते मरीजों को भर्ती किया गया था।बेशक युवाओं को मौका मिलना चाहिए लेकिन जब इसी तरह सभी क्षेत्र प्राइवेट ही हो जाएंगे तो सरकार मौका किस चीज़ का देगी।और जब युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में ही जाना पड़ेगा तो सरकार की जिम्मेदारी क्या बनती है।जहाँ हर साल लाखों बेरोजगारों की फौज खड़ी हो रही है वहां रोजगार के अवसर सीमित कर देना सरकार की विफलता का प्रतीक है।यदि देश को निजीकरण की इतनी ही जरूरत है तो क्यूं न लोकतांत्रिक सरकार को हटा कर संसद में प्राइवेट सरकार स्थापित कर दी जाए।
गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021
सोमवार, 4 जनवरी 2021
मैंने दर्द पाल रखे हैं
मुझे अकेला समझते हैं वो
गलतफहमी में हैं
मैंने दर्द पाल रखे हैं
महफ़िल जमाने के लिए
@nuj
बर्बाद
इस कदर हमने खुद को कर लिया बर्बाद फिर निकले नही जज़्बात कोई उसके जाने के बाद..!!
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आज अखिलेश यादव सरकार यानि यूपी सरकार के एक साल पूरे हो गए.इसी के साथ शुरू हो गया है माननीय मुख्यमंत्री की विभिन्न क्षेत्रों में सफलता और...
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आखिरकार बंगाल की जनता ने फिर एक बार अपनी 'दीदी' ममता बनर्जी पर विश्वास कर बंगाल की कमान उनके हाथों में सौंप दी। ममता बनर्जी लगातार त...
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हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 को संवैधानिक करार देते हुए समलैंगिंक सम्बन्धों...