वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने यूपीए-२ का अंतिम बजट पेश कर दिया.उन्होंने अपने भाषण में कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है और अगर हमने उपेक्षित एवं गरीब तबके पर विशेष ध्यान नहीं दिया तो समाज के कई वर्ग पिछड़ जायेंगे.लेकिन इस वर्ग के लिए जो बजट में आवंटन किया गया है वह वर्तमान ज़रूरतों के लिहाज़ से नाकाफी है.इसमें स्वास्थ्य,शिक्षा,और स्वच्छता पर वर्ष 2012-13 की तुलना में आवंटन कम हुआ है.
शिक्षा के क्षेत्र में कुल सार्वजनिक व्यय जीडीपी का 3.31% है जबकि कोठारी कमीशन ने 6% किये जाने की सिफारिश की है.इस बजट में शिक्षा पर कुल आवंटन जीडीपी का 0.69% किया गया है.जो चालू वित्त वर्ष के 0.66% की तुलना में मामूली रूप से बेहतर है.
2012-13 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सार्वजनिक व्यय जीडीपी का महज़ 1% था.ग्लोबल विज़न से इस मामले में हम निचले पायदान पर खड़े हैं.बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) के लिए 21,239 करोड़ रूपए आवंटित किये गए हैं जबकि इस मिशन का दायरा बढाने की उम्मीद थी.
शुद्ध पेयजल उपलब्ध करने के लिए सरकार ने 11वी पंचवर्षीय योजना तक 1,45,000 करोड़ रुपये खर्च किये.2011 की जन्गादना के अनुसार 43.5% लोगों के पास वाटर सप्लाई की सुविधा है .11% लोग कुँए से जल प्राप्त करते हैं.42% लोग हैंडपंप/ट्यूबवेल और 3.5% लोग अन्य स्त्रोतों से जल प्राप्त करते हैं.दूसरी तरफ स्वच्छता के मामले में तस्वीर निराशाजनक है.इसके बावजूद इस बार ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के मामले में बजटीय आवंटन जीडीपी का महज़ 0.13% किया गया है जो पिछले साल 0.14% था.
42,800 अमीरों पर टैक्स बोझ बढ़ने से गरीबों का कितना भला होगा! उनका भला तब होगा जब उनके लिए पोषक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके.रहने के लिए एक छोटा सा ही सही लेकिन स्वच्छ आवास मुहैया हो.
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