गुरुवार, 10 सितंबर 2020

ख़ता

 मंज़िल एक है रास्ते हज़ार..

खोना लाज़मी है यहाँ

इतनी बड़ी भी नहीं है ख़ता..!!

@nuj

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बर्बाद

इस कदर हमने खुद को कर लिया बर्बाद  फिर निकले नही जज़्बात कोई उसके जाने के बाद..!!