शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

मेरे नाम की रचना

अ-अब मत आना तुम 
नु-नुकसान तुम्हारा होगा
ज-जब करते थे हम इंतज़ार,वक़्त चला गया
दि-दिखी जो तेरी परछाईं भी
वा-वापस लौट जाऊंगा अपनी डगर
क-करके मेरा इंतज़ार 
र-रफ़्ता रफ़्ता तुम हो जाना आंखों से ओझल..!!

@nuj

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बर्बाद

इस कदर हमने खुद को कर लिया बर्बाद  फिर निकले नही जज़्बात कोई उसके जाने के बाद..!!